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ॐ

Anusthan

Extended spiritual practices spanning multiple days for specific goals. Powerful mantras and rituals performed by dedicated pandits.

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23 Results found

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anusthan
भगवान शिव

Mahamrityunjay Mantra anushthan

महामृत्युंजय मंत्र अत्यंत शक्तिशाली है। स्वास्थ्य लाभ और दीर्घायु के लिए इस मंत्र का जाप किया जाता है। मृत्यु के भय से निवारण कुंडली में कालसर्प दोष से मुक्ति एवं अन्य कार्य सिद्धि हेतु

3hr – 6hr
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anusthan
भगवान हनुमान

Hanuman Chalisa Anushthan

हनुमान चालीसा का पाठ अत्यंत शक्तिशाली है। मंगलवार और शनिवार को यह विशेष फलदायी है।

3hr – 5hr
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anusthan
देवी गायत्री

Gaytri Mantra Jap Anushthan

गायत्री मंत्र का सवा लाख बार जप करने से अनेक कार्यों की सिद्धि एवं हमारे जीवन में हुए जाने अनजाने पापों से मुक्ति प्रदान करता है। यह मंत्र ज्ञान, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा के लिए अत्यंत शक्तिशाली माना जाता है।

3hr – 4hr
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Mahalakshmi Sri suktam Anushthan  view 1Mahalakshmi Sri suktam Anushthan  view 2
anusthan
माँ लक्ष्मी

Mahalakshmi Sri suktam Anushthan

1-दिवसीय आध्यात्मिक साधना माँ लक्ष्मी की कृपा प्राप्ति के लिए। धन, समृद्धि और व्यापार वृद्धि हेतु।

3hr – 5hr
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भगवान हनुमान

Hanuman Chalisa Anushthan

40-दिवसीय हनुमान चालीसा पाठ अनुष्ठान। शक्ति, सुरक्षा और विघ्न निवारण के लिए।

4hr – 5hr
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सूर्य देव

Surya Grih Dosh Nivaran Anushthan

अपनी जन्म कुंडली के अनुसार ग्रहों की शुभता बढ़ाने एवं अशुभता को दूर करने हेतु नवग्रह शांति जाप या पाठ। वैदिक या तांत्रिक मंत्र द्वारा ग्रह संख्या के मंत्र का चार गुना जाप तथा ग्रहों की समिधा द्वारा हवन-पूर्णाहुति एवं उसका दान।

3hr – 5hr
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माँ दुर्गा (नवदुर्गा)

Shatchandi Maha Anushthan

शतचंडी महाअनुष्ठान में दुर्गा सप्तशती (देवी महात्म्य) का 100 बार पाठ किया जाता है, साथ ही एक भव्य यज्ञ (अग्नि अनुष्ठान) भी होता है। नवचंडी अनुष्ठान में दुर्गा सप्तशती के नौ पाठ किए जाते है। यह पूजा अत्यधिक वैदिक विद्वान ब्राह्मणों द्वारा की जाती है।

4hr – 6hr
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Kalsarp Dosh Nivaran Anushthan  view 1Kalsarp Dosh Nivaran Anushthan  view 2
anusthan
भगवान शिव एवं नाग

Kalsarp Dosh Nivaran Anushthan

काल सर्प दोष निवारण अनुष्ठान। विशेष मंत्रों और विधियों के साथ।

3hr – 5hr
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माँ बगलामुखी (पीताम्बरा देवी)

Bagulamukhi Anushthan

माँ बगलामुखी दस महाविद्याओं में से आठवीं महाविद्या हैं, जिन्हें पीताम्बरा देवी के नाम से भी जाना जाता है। वे स्तंभन शक्ति की अधिष्ठात्री देवी हैं, जो शत्रुओं की वाणी और कर्म को स्तंभित कर देती हैं। विशेष रूप से न्यायालय के मामलों में सफलता के लिए।

4hr – 6hr
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चन्द्रमा एवं भगवान शिव

Chandra Grih Dosh Nivaran Anushthan

यह एक वैदिक अनुष्ठान है जिनकी कुंडली में चंद्रमा से संबंधित कोई दोष होता है उस दोष का निवारण करता है

3hr – 5hr
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मंगल देव

Mangal Grih Dosh Nivaran Anushthan

*जन्मकुंडली में मंगल का प्रभाव* जन्म कुंडली में मंगल ग्रह ऊर्जा, साहस, भाई-बहन, भूमि, संपत्ति और कार्यसिद्धि का कारक है; शुभ होने पर यह व्यक्ति को पराक्रमी, सफल बनाता है, लेकिन अशुभ स्थिति में उग्र स्वभाव, मांगलिक दोष, वैवाहिक समस्याएं, और शारीरिक कष्ट (चोट, संक्रमण) दे सकता है, जिसका प्रभाव भाव, राशि और अन्य ग्रहों के साथ युति पर निर्भर करता है। *मंगल ग्रह के शुभ प्रभाव* (जब मजबूत हो): शारीरिक शक्ति: मजबूत शरीर, आत्मविश्वास और ऊर्जा प्रदान करता है। कार्य और सफलता: जीवन के हर क्षेत्र में सफलता, संघर्षों का सामना करने की क्षमता और जोश देता है। आर्थिक समृद्धि: धन और समृद्धि लाता है, विशेषकर भूमि और संपत्ति के मामलों में। भाई-बंधु: भाइयों, खासकर छोटे भाइयों से सुख और सहयोग मिलता है। प्रशासनिक क्षमता: नेतृत्व क्षमता और पराक्रम बढ़ाता है। *मंगल ग्रह के अशुभ प्रभाव* (जब कमजोर या पीड़ित हो): मांगलिक दोष: पहले, चौथे, सातवें, आठवें और बारहवें भाव में होने पर विवाह में देरी या बाधा उत्पन्न करता है। उग्र स्वभाव: क्रोध, आक्रामकता और लड़ाकू प्रवृत्ति बढ़ाता है, जिससे रिश्तों में तनाव आता है। शारीरिक कष्ट: चोट, संक्रमण, हड्डियों और मांसपेशियों की समस्याएं, रक्त संबंधी रोग हो सकते हैं। मानसिक अशांति: तनाव, चिंता और मन में बेचैनी पैदा करता है। आर्थिक हानि: वित्तीय कठिनाइयाँ और समस्याओं का कारण बन सकता है। *प्रभाव देखने के मुख्य बिंदु* (How to Determine): भाव (House): मंगल कुंडली के किस भाव (जैसे लग्न, सप्तम, द्वादश) में बैठा है, यह उसके प्रभाव को निर्धारित करता है। राशि (Zodiac Sign): मंगल किस राशि (मेष, वृश्चिक, मकर, कर्क, आदि) में है, यह उसके स्वभाव को बदलता है। दृष्टि (Aspects): अन्य ग्रहों की दृष्टि मंगल पर क्या पड़ रही है। शत्रुक्षेत्री या मित्रक्षेत्री: मंगल की शत्रु या मित्र राशि में स्थिति महत्वपूर्ण होती है। निष्कर्ष: मंगल का प्रभाव व्यक्ति की कुंडली के समग्र विश्लेषण के बाद ही पता चलता है। मजबूत मंगल जीवन में शक्ति और सफलता देता है, जबकि कमजोर या पीड़ित मंगल चुनौतियां पैदा कर सकता है, जिसके लिए ज्योतिषीय उपाय (जैसे पूजा, रत्न, व्रत) किए जाते हैं।

3hr – 5hr
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anusthan
नक्षत्र के देवता

Gand Mool Shanti Puja

गंडमूल नक्षत्र - ज्योतिष के 27 नक्षत्रों में से 6 गंडमूल नक्षत्र हैं: अश्विनी, आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल, और रेवती। दोष का कारण- जब राशि (जैसे मीन) समाप्त हो रही हो और नक्षत्र (जैसे रेवती) भी समाप्त हो रहा हो, तो उस संधि स्थल पर पैदा होने वाले बच्चे को गंडमूल दोष लगता है। प्रभाव- मान्यता है कि गंडमूल मे जन्म लेने वाले बच्चे को स्वास्थ्य, धन, या परिवार से संबंधित चुनौतियो का सामना करना पड सकता है। उपाय और शांति - इन नक्षत्रों मे जन्म लेने वाले बच्चों के लिए 27 दिनो बाद (या जब भी संभव हो) गंडमूल शांति पूजा और हवन किया जाता है, जिससे दोष शांत हो जाता है और जीवन में सकारात्मकता आती है।

2hr – 4hr
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वास्तुपुरुष मण्डल

Vastu Shanti Puja

महत्व और लाभ दोषों का निवारण- संरचनात्मक परिवर्तनों की आवश्यकता के बिना निर्माण, वास्तुकला या भूमि मे मौजूद दोषों का निवारण करता है। नकारात्मकता दूर करता है: यह स्वास्थ्य और समृद्धि को प्रभावित करने वाली नकारात्मक ऊर्जाओं और वास्तु दोषों को दूर करता है। सामंजस्य और प्रचुरता - सुख, समृद्ध और शांति के लिए आशीर्वाद का आह्वान करता है। प्रकृति का संतुलन- पांच तत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) और दिशाओं का सम्मान करता है वास्तु शांति कब करे घर में प्रवेश करने से पहले आमतौर पर गृह प्रवेश (नए घर में गृहप्रवेश) से पहले किया जाता है। नवीनीकरण- घर या व्यावसायिक स्थान के बडे पैमाने पर पुनर्निर्माण के बाद।

2hr – 4hr
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बुध ग्रह

Budh Grih Dosh Nivaran Anushthan

बुध का शांति अनुष्ठान (Budh Shanti Anushthan) कुंडली में कमजोर, अस्त या पीड़ित बुध ग्रह को शांत करने और उनके सकारात्मक प्रभाव (बुद्धि, वाणी, व्यापार में वृद्धि) पाने के लिए की जाने वाली एक वैदिक पूजा है। इसमें मुख्य रूप से गणपति पूजा, बुध मंत्र जप,और हरे रंग की वस्तुओं का दान किया जाता है।

2hr – 5hr
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बृहस्पति देव /नारायण

Guru Grih Dosh Nivaran Anushthan

यह पूजा मुख्य रूप से कुंडली में गुरु (बृहस्पति) के कमजोर होने, नीच का होने या "गुरु चांडाल दोष" जैसी स्थितियों को शांत करने के लिए की जाती है। जब गुरु अशुभ फल देता है, तो शिक्षा में बाधा, धन की कमी, विवाह में देरी और स्वास्थ्य (पेट या लीवर) की समस्यायें आती हैं

3hr – 5hr
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शुक्र देव/ मां दुर्गा

Shukra Grih Dosh Nivaran Anushthan

शुक्र ग्रह (Venus) विलासिता, प्रेम, सुख-सुविधा, और वैवाहिक आनंद का कारक है। कुंडली में शुक्र दोष (Shukra Dosh) होने पर आर्थिक तंगी, वैवाहिक जीवन में अनबन, चर्म रोग और आकर्षण में कमी जैसी समस्याएं आती हैं।

3hr – 5hr
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शनिदेव/भगवान शिव

Shani Grih Dosh Nivaran Anushthan

शनि ग्रह (Saturn) को न्याय का देवता और कर्मफल प्रदाता माना जाता है। जब कुंडली में शनि भारी हो, साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही हो, तो जीवन में संघर्ष, देरी, और मानसिक तनाव बढ जाता है।

3hr – 5hr
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राहु देव

Rahu Grih Dosh Nivaran Anushthan

राहु (Rahu) को ज्योतिष में एक छाया ग्रह माना जाता है, जो भ्रम, अचानक होने वाली घटनाएं, और मानसिक तनाव का कारक है। जब राहु अशुभ होता है, तो व्यक्ति को भ्रम, अज्ञात भय, शत्रुओं का डर और कार्यो में अचानक रुकावटों का सामना करना पड़ता है।

3hr – 5hr
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केतु देव/गणेश जी

Ketu Grih Dosh Nivaran Anushthan

केतु (Ketu) को मोक्ष और अध्यात्म का कारक माना जाता है, लेकिन दोष होने पर यह चर्म रोग, जोड़ों का दर्द और मानसिक भटकाव देता है।

3hr – 5hr
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कुल देवी

Kuldevi Stotram Path Anushthan

यह स्तोत्र कुलदेवी को प्रसन्न कर वंश की रक्षा और बाधाओं को दूर करने के लिए अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है।

1hr – 3hr
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गणेश, विष्णु, शिव, दुर्गा, सूर्य

Panchdev Raksha Kavach Anushthan

इसका नियमित पाठ या श्रवण करने से हर दिशा में विजय प्राप्त करता एक अत्यंत प्रभावशाली आध्यात्मिक सुरक्षा कवच है,

1hr – 3hr
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नारायण,पितृ देव

Brahman Bhojan

ब्रह्म भोज (या ब्राह्मण भोज) हिंदू धर्म में एक पवित्र परंपरा है, जिसमें पूजा, अनुष्ठान या श्राद्ध के बाद ब्राह्मणो या योग्य व्यक्तियों को आदरपूर्वक सात्विक भोजन कराया जाता है। यह पूर्वजों की आत्मा की शांति, मोक्ष प्राप्ति और देवी-देवताओं के सम्मान हेतु किया जाता है। इसे अतिथि को भगवान का रूप मानकर पूजा और दान देने के रूप में भी देखा जाता है।

0hr 30min – 1hr
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श्री कृष्ण

Shrimad Bhagwat Moolpath

श्रीमद्भागवत महापुराण भक्ति तथा मुक्ति दोनों प्रदान करने वाली है | जिस परिवार के नाम से श्रीमद्भागवत महापुराण का पाठ होता है उस परिवार में भक्ति का प्रादुर्भाव स्वतः ही हो जाता है | माता लक्ष्मी की कृपा हमेशा बनी रहती है | शत्रु स्वतः ही नष्ट हो जाते हैं | व्यक्ति को मान-सम्मान की प्राप्ति होती है | उस परिवार में दरिद्रता कभी नहीं आती |

4hr – 6hr
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