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ॐ

Anusthan

Extended spiritual practices spanning multiple days for specific goals. Powerful mantras and rituals performed by dedicated pandits.

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10 Results found

महामृत्युंजय मंत्र जप अनुष्ठान  view 1महामृत्युंजय मंत्र जप अनुष्ठान  view 2
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भगवान शिव

महामृत्युंजय मंत्र जप अनुष्ठान

महामृत्युंजय मंत्र अत्यंत शक्तिशाली है। स्वास्थ्य लाभ और दीर्घायु के लिए इस मंत्र का जाप किया जाता है। मृत्यु के भय से निवारण कुंडली में कालसर्प दोष से मुक्ति एवं अन्य कार्य सिद्धि हेतु

3hr – 6hr
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गायत्री मंत्र जप अनुष्ठान view 1गायत्री मंत्र जप अनुष्ठान view 2
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देवी गायत्री

गायत्री मंत्र जप अनुष्ठान

गायत्री मंत्र का सवा लाख बार जप करने से अनेक कार्यों की सिद्धि एवं हमारे जीवन में हुए जाने अनजाने पापों से मुक्ति प्रदान करता है। यह मंत्र ज्ञान, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा के लिए अत्यंत शक्तिशाली माना जाता है।

3hr – 4hr
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महालक्ष्मी श्रीसूक्तं अनुष्ठान view 1महालक्ष्मी श्रीसूक्तं अनुष्ठान view 2
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माँ लक्ष्मी

महालक्ष्मी श्रीसूक्तं अनुष्ठान

1-दिवसीय आध्यात्मिक साधना माँ लक्ष्मी की कृपा प्राप्ति के लिए। धन, समृद्धि और व्यापार वृद्धि हेतु।

3hr – 5hr
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श्री हनुमान चालीसा अनुष्ठान view 1श्री हनुमान चालीसा अनुष्ठान view 2
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भगवान हनुमान

श्री हनुमान चालीसा अनुष्ठान

40-दिवसीय हनुमान चालीसा पाठ अनुष्ठान। शक्ति, सुरक्षा और विघ्न निवारण के लिए।

4hr – 5hr
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सूर्य ग्रह शांति जप अनुष्ठान view 1सूर्य ग्रह शांति जप अनुष्ठान view 2
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सूर्य देव

सूर्य ग्रह शांति जप अनुष्ठान

अपनी जन्म कुंडली के अनुसार ग्रहों की शुभता बढ़ाने एवं अशुभता को दूर करने हेतु नवग्रह शांति जाप या पाठ। वैदिक या तांत्रिक मंत्र द्वारा ग्रह संख्या के मंत्र का चार गुना जाप तथा ग्रहों की समिधा द्वारा हवन-पूर्णाहुति एवं उसका दान।

3hr – 5hr
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माँ नवदुर्गा शतचंडी महाअनुष्ठान view 1माँ नवदुर्गा शतचंडी महाअनुष्ठान view 2
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माँ दुर्गा (नवदुर्गा)

माँ नवदुर्गा शतचंडी महाअनुष्ठान

शतचंडी महाअनुष्ठान में दुर्गा सप्तशती (देवी महात्म्य) का 100 बार पाठ किया जाता है, साथ ही एक भव्य यज्ञ (अग्नि अनुष्ठान) भी होता है। नवचंडी अनुष्ठान में दुर्गा सप्तशती के नौ पाठ किए जाते है। यह पूजा अत्यधिक वैदिक विद्वान ब्राह्मणों द्वारा की जाती है।

4hr – 6hr
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काल सर्प दोष निवारण अनुष्ठान view 1काल सर्प दोष निवारण अनुष्ठान view 2
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भगवान शिव एवं नाग

काल सर्प दोष निवारण अनुष्ठान

काल सर्प दोष निवारण अनुष्ठान। विशेष मंत्रों और विधियों के साथ।

3hr – 5hr
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माँ बगलामुखी अनुष्ठान view 1माँ बगलामुखी अनुष्ठान view 2
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माँ बगलामुखी (पीताम्बरा देवी)

माँ बगलामुखी अनुष्ठान

माँ बगलामुखी दस महाविद्याओं में से आठवीं महाविद्या हैं, जिन्हें पीताम्बरा देवी के नाम से भी जाना जाता है। वे स्तंभन शक्ति की अधिष्ठात्री देवी हैं, जो शत्रुओं की वाणी और कर्म को स्तंभित कर देती हैं। विशेष रूप से न्यायालय के मामलों में सफलता के लिए।

4hr – 6hr
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चंद्र दोष निवारण जप अनुष्ठान  view 1चंद्र दोष निवारण जप अनुष्ठान  view 2
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चन्द्रमा एवं भगवान शिव

चंद्र दोष निवारण जप अनुष्ठान

यह एक वैदिक अनुष्ठान है जिनकी कुंडली में चंद्रमा से संबंधित कोई दोष होता है उस दोष का निवारण करता है

3hr – 5hr
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मंगल दोष निवारण जप अनुष्ठान  view 1मंगल दोष निवारण जप अनुष्ठान  view 2
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मंगल देव

मंगल दोष निवारण जप अनुष्ठान

*जन्मकुंडली में मंगल का प्रभाव* जन्म कुंडली में मंगल ग्रह ऊर्जा, साहस, भाई-बहन, भूमि, संपत्ति और कार्यसिद्धि का कारक है; शुभ होने पर यह व्यक्ति को पराक्रमी, सफल बनाता है, लेकिन अशुभ स्थिति में उग्र स्वभाव, मांगलिक दोष, वैवाहिक समस्याएं, और शारीरिक कष्ट (चोट, संक्रमण) दे सकता है, जिसका प्रभाव भाव, राशि और अन्य ग्रहों के साथ युति पर निर्भर करता है। *मंगल ग्रह के शुभ प्रभाव* (जब मजबूत हो): शारीरिक शक्ति: मजबूत शरीर, आत्मविश्वास और ऊर्जा प्रदान करता है। कार्य और सफलता: जीवन के हर क्षेत्र में सफलता, संघर्षों का सामना करने की क्षमता और जोश देता है। आर्थिक समृद्धि: धन और समृद्धि लाता है, विशेषकर भूमि और संपत्ति के मामलों में। भाई-बंधु: भाइयों, खासकर छोटे भाइयों से सुख और सहयोग मिलता है। प्रशासनिक क्षमता: नेतृत्व क्षमता और पराक्रम बढ़ाता है। *मंगल ग्रह के अशुभ प्रभाव* (जब कमजोर या पीड़ित हो): मांगलिक दोष: पहले, चौथे, सातवें, आठवें और बारहवें भाव में होने पर विवाह में देरी या बाधा उत्पन्न करता है। उग्र स्वभाव: क्रोध, आक्रामकता और लड़ाकू प्रवृत्ति बढ़ाता है, जिससे रिश्तों में तनाव आता है। शारीरिक कष्ट: चोट, संक्रमण, हड्डियों और मांसपेशियों की समस्याएं, रक्त संबंधी रोग हो सकते हैं। मानसिक अशांति: तनाव, चिंता और मन में बेचैनी पैदा करता है। आर्थिक हानि: वित्तीय कठिनाइयाँ और समस्याओं का कारण बन सकता है। *प्रभाव देखने के मुख्य बिंदु* (How to Determine): भाव (House): मंगल कुंडली के किस भाव (जैसे लग्न, सप्तम, द्वादश) में बैठा है, यह उसके प्रभाव को निर्धारित करता है। राशि (Zodiac Sign): मंगल किस राशि (मेष, वृश्चिक, मकर, कर्क, आदि) में है, यह उसके स्वभाव को बदलता है। दृष्टि (Aspects): अन्य ग्रहों की दृष्टि मंगल पर क्या पड़ रही है। शत्रुक्षेत्री या मित्रक्षेत्री: मंगल की शत्रु या मित्र राशि में स्थिति महत्वपूर्ण होती है। निष्कर्ष: मंगल का प्रभाव व्यक्ति की कुंडली के समग्र विश्लेषण के बाद ही पता चलता है। मजबूत मंगल जीवन में शक्ति और सफलता देता है, जबकि कमजोर या पीड़ित मंगल चुनौतियां पैदा कर सकता है, जिसके लिए ज्योतिषीय उपाय (जैसे पूजा, रत्न, व्रत) किए जाते हैं।

3hr – 5hr
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